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श्रम
ब्यूरो |
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सर्वेक्षण तथा अध्ययन
योजना स्कीमें
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सर्वेक्षण का नाम |
प्रारम्भ करने का वर्ष |
उद्देश्य |
संग्रहित आंकड़े |
उपलब्धियां |
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1. ग्रामीण श्रम अन्वेषण |
प्रथम ग्रामीण श्रम अन्वेषण वर्ष 1963-64 के दौरान आयोजित किया गया । इससे पूर्व वर्ष 1950-51 तथा 1956-57 में दो खेतिहर श्रमिक अन्वेषण आयोजित किए गए थे । वर्ष 1974-75, 1977-78, 1983, 1987-88, 1993-94 तथा 1999-2000 में क्रमश: अनुवर्ती ग्रामीण श्रम अन्वेषण आयोजित किए गए । |
ग्रामीण श्रम अन्वेषणों के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है: 1.खेतिहर तथा ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांकों की नई श्रृंखला के संशोधन/संकलन के लिए मूल आंकड़ों का संग्रहण 2. ग्रामीण श्रमिकों की सामान्यत: तथा खेतिहर श्रमिकों की विशेषत: महत्वपूर्ण सामाजार्थिक विशेषताओं पर विश्वसनीय आंकलन करना 3. ग्रामीण श्रम परिवारों की सामाजार्थिक स्थितियों में प्रवृतियों का विश्लेषण-18 खेतिहर तथा गैर खेतिहर व्यवसायों के संबंध में मजदूरी दरों का संग्रहण, संकलन तथा प्रकाशन
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जनसंख्या सरंचना, रोजगार तथा बेरोजगारी की सीमा, मजदूरी तथा उपार्जन, पारिवारिक उपभोग व्यय, ऋणग्रस्तता तथा सामान्य विशेषताओं आदि से संबंधित आंकडे |
1. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-खेतिहर श्रमिक/ग्रामीण श्रमिक का प्रति माह प्रकाशन 2. 18 खेतिहर तथा गैर-खेतिहर व्यवसायों से संबंधित मजदूरी दर आंकड़ों का मासिक प्रकाशन (i) ग्रामीण परिवारों का उपभोग एवं व्यय (ii) ग्रामीण श्रम परिवारों की ऋणग्रस्तता (iii) ग्रामीण परिवारों की सामान्य विशेषताएं (iv) मजदूरी एवं उपार्जन (v) रोजगार तथा बेरोजगारी से संबंधित रिपोर्ट । 3. मई, 2007 माह तक ग्रामीण मजदूरी दर आंकडों को प्रकाशित कर दिया गया था । 4. ग्रामीण श्रम अन्वेषण 2004-05 के लिए आंकडों का सारणीकरण-रोजगार तथा बेरोजगारी पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है । |
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2. श्रमिक वर्ग का पारिवारिक आय एवं व्यय सर्वेक्षण
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प्रथम सर्वेक्षण आधार 1960 =100 के लिए वर्ष 1958-59 में, द्वितीय 1971=100 के लिए 1970-71 में, तृतीय आधार 1982=100 के लिए वर्ष 1981-82 में, वर्तमान श्रृंखला 1982=100 के आधार संशोधन हेतु चतुर्थ सर्वेक्षण वर्ष 1999-2000 में किया गया ।
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औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार का संशोधन तथा नया वर्ष आधार के रूप में लेकर सूचकांक का संकलन तथा आय एवं व्यय आंकड़ों का विश्लेषण तथा केन्द्र विशेष रिपोर्टों का प्रकाशन
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कारखानों, खननों, बागानों, रेलवे, मोटर परिवहन उपक्रम, विद्युत उत्पादन, वितरण संस्थानों तथा पोत एवं गोद में कार्यरत औद्योगिक श्रमिकों का मदवार उपभोग व्यय का संग्रहण, मासिक/साप्ताहिक मूल्य
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1. औद्योगिक श्रमिकों का सूचकांक प्रतिमाह संकलन एवं प्रकाशित किया जाता है । 2. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की वार्षिक रिपोर्ट का प्रकाशन 3. प्रत्येक सर्वेक्षण की अलग से केन्द्र विशेष रिपोर्टो का प्रकाशन जो साथ-2 केन्द्र की आर्थिक पृष्ठ भूमि, पारिवारिक विशेषताओं जैसे साक्षरता दर, वैवाहिक स्थिति, कार्य स्थिति, आर्थिक स्थिति, परिवार सरंचना, अर्जन क्षमता, पारिवारिक आय एवं व्यय, खाद्य-उपभोग, बजट स्थिति, ऋणग्रस्तता, आवास आदि पर सूचना सम्मिलित करती है । 4.दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई, बगलौर तथा अहमदाबाद केन्द्रों के लिए 6 केन्द्र विशेष रिपोर्टे अवमुक्त कर दी गई है । 14 और रिपोर्टे अवमुक्त किए जाने हेतु तैयार हैं तथा 58 रिपोर्टे मुद्रणाधीन हैं । अखिल भारतीय सामान्य रिपोर्ट का प्रारूपण पूरा कर लिया गया है तथा इसे अन्तिम रूप दिया जा रहा है ।
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3. व्यावसायिक मजदूरी सर्वेक्षण
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व्यावसायिक मजदूरी सर्वेक्षण का प्रथम चरण वर्ष 1958-59 में आयोजित किया गया, द्वितीय चरण वर्ष 1963-65 में, तृतीय 1974-79 में, चतुर्थ वर्ष 1985-92 में तथा पांचवा चरण वर्ष 1993-99 में आयोजित किया गया था । व्यावसायिक मजदूरी सर्वेक्षण का छठा चरण वर्ष 2002 में आरम्भ किया गया तथा इसमें 56 उद्योगों को सम्मिलित किया जाएगा । |
1.मुख्य विनिर्माण, खनन तथा बागान उद्योगों के मजदूरी दर सूचकांक बनाने हेतु आवश्यक मूल्य आंकड़े प्राप्त करना 2. चयनित उद्योगों में विभिन्न व्यवसायों में श्रमिकों के मजदूरी घटकों पर आंकड़े प्राप्त करना । 3. समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 के कार्यान्वयन का अध्ययन ।
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विनिर्माण, बागान, खनन तथा सेवा क्षेत्र उद्योगों में व्यवसायवार रोजगार मजदूरी दर, समयोपरि तथा उपार्जन पर आंकड़ों को एकत्रित किया जाता है ।
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छठे दौर के तहत चार सेवा क्षेत्र उद्योगों के संबंध में रिपोर्टे अवमुक्त कर दी गई है तथा 3 बागान तथा चाय संसाधन उद्योगों पर भी रिपोर्ट अवमुक्त कर दी गई है । 4 खनन उद्योगों की रिपोर्ट को अन्तिम रूप दिया जा रहा है । सूती वस्त्र उद्योग में फील्ड सर्वेक्षण से संबंधित आंकडों का सारणीकरण जारी है ।
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4. श्रमिकों के विभिन्न समूहों की सामाजार्थिक स्थितियां
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वर्ष 2001 ( 4 योजना स्कीमों अर्थात् (i) असंगठित क्षेत्र सर्वेक्षण (1971) (ii) शहरी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रमिकों का सर्वेक्षण (1973) (iii) न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के कार्यान्वयन पर मूल्यांकन अध्ययन (1981) तथा (iv) महिला श्रमिकों का सामाजार्थिक सर्वेक्षण (1975) को मिलाकर स्कीम प्रारम्भ की गई ।
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लक्षित समूहों की कार्यकारी एवं निर्वाह स्थितियों को सुधारने के लिए उचित उपाय निर्धारण हेतु सुझाव देने के लिए संबंधित श्रम अधिनियमों के तहत निर्धारित प्रावधानों के कार्यान्वयन के मूल्यांकन की दृष्टि से तथा सूचीबध्द नियोजनों में लागू न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों की सीमा का मूल्यांकन करने हेतु उद्योगो/नियोजनों में असंगठित श्रमिकों की कार्यकारी एवं निर्वाह स्थितियों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा महिला श्रमिकों की सामाजार्थिक स्थितियों पर अखिल भारतीय स्तर पर आंकड़े एकत्रित करने हेतु विस्तृत कार्य क्षेत्र तथा विषय विस्तार सहित अखिल भारतीय आधार पर बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण आयोजित करना । 2. उदारीकरण तथा सार्वभौमिकरण के अनुसरण में उद्योगवार प्रवृतियों जैसे: मजदूरी, रोजगार स्तर, उन्नयन कौशल अहर्ताएं तथा कौशल बाहुल्य का अध्ययन करना । |
रोजगार मजदूरी तथा उपार्जन, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम कल्याण, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध, पारिवारिक विशेषताओं, पारिवारिक सम्पत्ति, ऋणग्रस्तता, आवासीय स्थितियों, अस्पृश्यता वातावरण तथा परिवेश तथा कल्याण कार्यक्रम की सजगता आदि जैसी कार्यकारी तथा निर्वाह स्थितियों पर आंकडों को एकत्रित किया जाता है । ई.एम,डब्ल्यू. अध्ययनों के तहत विभिन्न सूचीबध्द नियोजनों में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुपालन के स्तर तथा सीमा, अपूर्ण अनुपालन के लिए उत्तरदायी कारकों आदि पर आंकड़े एकत्रित किए जाते हैं । |
अब तक महिला श्रमिकों पर सामाजार्थिक सर्वेक्षण, अनुसूचित जाति श्रमिकों पर 9 तथा अनुसूचित जनजाति श्रमिकों पर 7 तथा असंगठित क्षेत्र श्रमिकों पर 30 सर्वेक्षण आयोजित किए गए हैं । कृषि, खनन, भवन एवं निर्माण तथा बीड़ी निर्माण संस्थानों में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के कार्यान्वयन के मूल्यांकन हेतु अब तक 25 अध्ययन किए जा चुके है । सभी सर्वेक्षणों/अध्ययनों की रिपोर्टे प्रकाशित कर दी गई है ।
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5. उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण (प्रतिदर्श क्षेत्र)
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प्रतिदर्श क्षेत्र वर्ष 1976-77 में प्रारम्भ किया गया ।
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1. विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार, अनुपस्थिति, श्रम आवर्त, उपार्जन, तथा श्रम लागत पर डेटाबेस तैयार करना । 2. श्रम लागत के विभिन्न घटकों जैसे मजदूरी/वेतन, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, भविष्य निधि तथा कर्मचारी कल्याण खर्च का विश्लेषण करना । |
विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार, अनुपस्थिति, श्रम आवर्त, उपार्जन, तथा श्रम लागत पर आकड़ों को घटकवार एकत्रित किया जाता हैं । |
उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट वर्ष 2003-2004 भाग-I अवमुक्त कर दी गई है तथा वर्ष 2003-2004 के लिए अनुपस्थिति, श्रम आवर्त, रोजगार तथा श्रम लागत (भाग-II) पर रिपोर्ट मुद्रणाधीन है । वर्ष 2004-05 के लिए आंकडों को अन्तिम रूप दिया जा रहा है ।
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1. श्रम स्थितियों का सर्वेक्षण |
वर्ष 1959 |
विभिन्न श्रम अधिनियमों के तहत प्रावधानों की तुलना में विभिन्न उद्योगों में संगठित श्रमिकों की कार्यकारी स्थितियों में हुई प्रगति का मूल्यांकन करना । |
रोजगार, मजदूरी तथा उपार्जन, कार्यकारी स्थितियों, कल्याण सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंधों आदि पर सूचना |
अब तक 60 उद्योगों में 62 सर्वेक्षण आयोजित किए जा चुके है तथा उन पर रिपोर्टे प्रकाशित की जा चुकी है । |
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2. ठेका श्रम सर्वेक्षण |
वर्ष 1955 |
विभिन्न उद्योगों में ठेका श्रमिकों की समस्याओं की प्रकृति तथा सीमा का निश्चित पता लगाना तथा विभिन्न अधिनियमों के तहत ठेका श्रमिकों के कल्याण हेतु निर्धारित प्रावधानों के कार्यान्वयन का निर्धारण करना । |
रोजगार मजदूरी तथा उपार्जन, कार्यकारी स्थितियों, कल्याण सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा पर संविदाकारों द्वारा उपलब्ध करवाई गई सूचना तथा ठेका श्रमिकों द्वारा किए कार्य का विवरण । |
अब तक 40 उद्योगों/संस्थानों में 45 सर्वेक्षण किए जा चुके हैं तथा 44 सर्वेक्षणों की रिपोर्टें (सीमित परिचालन) प्रकाशित की जा चुकी है ।
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3. उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण(गणना क्षेत्र)
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गणना क्षेत्र वर्ष 1960-61 में प्रारम्भ किया गया ।
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1.विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार, अनुपस्थिति, श्रम आवर्त, उपार्जन, तथा श्रम लागत पर डेटाबेस तैयार करना । 2.श्रम लागत के विभिन्न घटकों जैसे मजदूरी/वेतन, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, भविष्य निधि तथा कर्मचारी कल्याण खर्च का विश्लेषण करना । |
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